➤ मनाली-लेह हाईवे पर बनेंगी तीन नई सुरंगें, 50 किलोमीटर घटेगी दूरी
➤ 10 घंटे का सफर सिमटकर लगभग 6 घंटे का रह जाएगा
➤ हर मौसम में खुला रहेगा मार्ग, पर्यटन और सेना को होगा बड़ा लाभ
हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के बीच संपर्क को नई मजबूती देने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग को देश के सबसे आधुनिक और ऑल-वेदर पर्वतीय मार्गों में बदलने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत बारालाचा ला, लाचुलुंग ला और तंगलंग ला दर्रों के नीचे तीन अत्याधुनिक सुरंगों के निर्माण की योजना पर काम तेज कर दिया गया है। इन परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल ही में इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की जानकारी साझा करते हुए बताया कि तीनों सुरंगों की डीपीआर तैयार की जा रही है। इन परियोजनाओं की जिम्मेदारी नेशनल हाईवेज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) को सौंपी गई है। वर्ष 2021 में इन परियोजनाओं पर प्रारंभिक स्तर का कार्य शुरू किया गया था और अब इन्हें आगे बढ़ाने की दिशा में प्रक्रिया तेज हो गई है।
प्रस्तावित योजना के अनुसार बारालाचा ला के नीचे लगभग 13.2 किलोमीटर लंबी सुरंग, लाचुलुंग ला के नीचे करीब 14.7 किलोमीटर लंबी सुरंग तथा तंगलंग ला के नीचे लगभग 7.3 किलोमीटर लंबी सुरंग बनाई जाएगी। इन सुरंगों के निर्माण के बाद वाहनों को बर्फबारी, खराब मौसम और ऊंचे दर्रों की कठिन चढ़ाई का सामना नहीं करना पड़ेगा। यात्री सीधे सुरंगों के माध्यम से सुरक्षित और तेज यात्रा कर सकेंगे।
इन सुरंगों के निर्माण से मनाली-लेह मार्ग की कुल दूरी लगभग 50 किलोमीटर तक कम हो जाएगी। वर्तमान में जहां यह सफर करीब 10 घंटे का है, वहीं सुरंगों के बनने के बाद यात्रा का समय घटकर लगभग 6 घंटे रह सकता है। इससे न केवल यात्रियों का समय बचेगा बल्कि ईंधन की खपत में भी कमी आएगी और यात्रा अधिक आरामदायक बनेगी।
प्रदेश के पर्यटन क्षेत्र के लिए भी यह परियोजना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। वर्षभर सड़क संपर्क उपलब्ध होने से मनाली, लाहौल, स्पीति और लेह में पर्यटन गतिविधियों को नया प्रोत्साहन मिलेगा। होटल व्यवसाय, होम-स्टे, टैक्सी ऑपरेटर, रेस्टोरेंट और स्थानीय व्यापारियों को इसका सीधा लाभ मिलने की संभावना है। लंबे समय तक मार्ग बंद रहने की समस्या कम होने से पर्यटकों की आवाजाही भी बढ़ेगी।
इसके साथ ही किसानों और बागवानों को भी बेहतर परिवहन सुविधा मिलेगी। फलों, सब्जियों और अन्य कृषि उत्पादों को बाजार तक कम समय में पहुंचाया जा सकेगा। बेहतर सड़क नेटवर्क स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगा, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सामरिक दृष्टि से भी यह परियोजना बेहद अहम है। मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग लद्दाख के सीमावर्ती क्षेत्रों तक सेना की रसद, सैन्य उपकरण और जवानों की आवाजाही का प्रमुख मार्ग है। नई सुरंगों के बनने के बाद सेना की आपूर्ति व्यवस्था अधिक तेज, सुरक्षित और मौसम पर कम निर्भर हो जाएगी। चीन सीमा के निकट संवेदनशील क्षेत्रों तक हर मौसम में पहुंच सुनिश्चित करने के लिए इन परियोजनाओं को रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अटल टनल, जोजिला टनल और निर्माणाधीन शिंकू ला सुरंग की तरह ये नई परियोजनाएं भी देश के पर्वतीय सड़क नेटवर्क में क्रांतिकारी बदलाव लाएंगी। इनके पूरा होने के बाद मनाली-लेह राष्ट्रीय राजमार्ग देश के सबसे सुरक्षित, आधुनिक और वर्षभर चालू रहने वाले मार्गों में शामिल हो जाएगा।



